सर्वोत्तम सुक्तिया


आत्मरति :  महान कार्यो के लिए पहली जरुरत है आत्मविश्वास.

आचरण : वह आदमी वास्तव में बुद्धिमान है जो क्रोध में भी गलत बात मुह से नहीं निकालता.

अति : अति दान से दरिद्रता और अति लोभ से तिरस्कार होता है. अति नाश
का कारन है. इसलिए अति से सर्वदा दूर रहे.

अज्ञान : कला एक शत्रु है, जिस का  नाम है अज्ञान.

असत्य : झूठ बोलने वाले को न मित्र मिलता है, न पुण्य, न यश.

असंभव : प्रत्यके अच्छा कार्य पहले असंभव नजर आता है.

अवसर : महान पुरुष अवसर की कमी की शिकायत कभी नहीं करते.

4 thoughts on “सर्वोत्तम सुक्तिया

  1. Rashi March 9, 2010 at 5:43 pm Reply

    अति सुन्दर sir!

    • Vishal Jain March 10, 2010 at 4:43 pm Reply

      धन्यवाद् आपका

  2. Rashi March 11, 2010 at 3:45 pm Reply

    It’s my pleasure!

    • Vishal Jain March 11, 2010 at 5:15 pm Reply

      Your welcome

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